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पहली मुलाक़ात, आरव और मीरा की, एक छोटी-सी कॉफ़ी शॉप में हुई।
बाहर बारिश हो रही थी। मीरा ने गलती से आरव की कॉफ़ी उठा ली
और एक घूंट पीकर बोली, "इसमें इतनी चीनी क्यों है?"
आरव हँसते हुए बोला, "क्योंकि वो मेरी कॉफ़ी है।"
दोनों हँस पड़े। उस छोटी-सी गलती के बाद वे लगभग तीन घंटे वहीं बैठे बातें करते रहे।
कुछ दिनों बाद दोनों डिनर के लिए गए। वापस आते समय अचानक बारिश शुरू हो गई।
उनके पास सिर्फ़ एक छोटी-सी छतरी थी।
दोनों पूरी तरह भीग गए, लेकिन घर पहुँचने तक हँसते रहे।
उस दिन से उनकी छोटी-सी छतरी उनके लिए "पाँच सितारा होटल" बन गई।
उनकी पहली रोड ट्रिप में आरव रास्ता भूल गया।
मीरा ने पूछा, "गूगल मैप्स क्यों नहीं चला रहे?"
आरव ने कहा, "मुझ पर भरोसा करो। मैं रास्ता जानता हूँ।"
दो घंटे बाद भी वे रास्ता ढूँढ रहे थे।
तब से जब भी आरव रास्ता भूलता है, मीरा हँसकर कहती है, "भरोसा करो, एक्सप्लोरर!"
उन्हें समुद्र किनारे सूर्योदय देखना भी बहुत पसंद था। वे घंटों बैठकर आसमान के रंग बदलते देखते।
आरव अक्सर मीरा के बैग में छोटे-छोटे प्यार भरे नोट रख देता था।
और जब भी दोनों साथ खाना खाते, जो पहले कहता "मुझे भूख नहीं है,"
वही बाद में दूसरे की प्लेट से खाना चुरा लेता।
एक समय ऐसा आया जब दोनों अलग-अलग शहरों में रहने लगे।
कई महीनों तक वे मिल नहीं पाए।
लेकिन हर रात एक-दूसरे से फ़ोन पर बात करते। दिन की छोटी-छोटी बातें बताते।
कभी-कभी बिना कुछ कहे बस फ़ोन पर साथ रहते।
कई महीनों बाद जब वे रेलवे स्टेशन पर मिले, मीरा दौड़कर आरव के पास गई और उसे गले लगा लिया।
उस पल आरव को समझ आया कि उसे महँगी डेट्स या बड़ी यात्राएँ नहीं याद आती थीं।
उसे सिर्फ़ मीरा याद आती थी।
एक दिन आरव मीरा को उसी कॉफ़ी शॉप में वापस ले गया जहाँ वे पहली बार मिले थे।
उसने दो कॉफ़ी मँगाईं। फिर हमेशा की तरह मीरा की कॉफ़ी का एक घूंट चुरा लिया।
मीरा बोली, "तुम अभी भी मेरी कॉफ़ी चुराते हो?"
आरव मुस्कुराया, घुटने पर बैठ गया और बोला:
"जिस दिन तुमसे मिला था, उसी दिन से तुम्हारी ज़िंदगी के छोटे-छोटे हिस्से चुराता आ रहा हूँ।
क्या अब पूरी ज़िंदगी मेरे साथ बिताओगी?"
मीरा ने मुस्कुराकर हाँ कहा।
और आज भी, जब दोनों उस कॉफ़ी शॉप में जाते हैं—
वही मेज़ होती है। दो कॉफ़ी होती हैं। और आरव आज भी मीरा की कॉफ़ी चुरा लेता है।
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