Nothing playing

मेरे birthday के दिन कॉलेज में,
Library के बाहर तुमसे मुलाकात हुई,
तुमने अनजाने में wish किया मुझे,
और बस यूँ ही एक शुरुआत हुई।
फिर तुम्हारी flirting से बातें शुरू हुईं,
घंटों-घंटों रातों में बातें होती रहीं,
सुबह तुम्हें office जाना होता था,
फिर भी हमारी बातें चलती रहीं।
तुम मेरे लिए शायरियाँ लिखते रहे,
अपने दिल के जज़्बात कहते रहे,
और तुम्हारी इन कोशिशों के बीच,
मैं तुमसे धीरे-धीरे प्यार करती गई।
रविश, तेरा नाम ही अब
मेरी रोज़ की ज़िंदगी का सबसे खूबसूरत शब्द है,
तुझसे मिली तो जाना मैंने,
मुझे भी इतना प्यार मिल सकता है।
तुमसे मिली तो जाना मैंने,
कोई इतना अपना भी हो सकता है,
तुम ना मिलते अगर मुझे,
तो शायद ये एहसास कभी ना होता।
तीन-चार महीने बाद तुमने,
अपने प्यार का इज़हार किया,
और फिर मेरी मम्मी के सामने,
तुमने बिना डरे कह दिया—
कि तुम मुझसे बहुत प्यार करते हो,
और हमेशा मेरा ख्याल रखोगे।
तुम्हारा वो confidence देखकर,
मैं अपनी feelings रोक ना सकी।
इक्कीस जून दो हज़ार चौबीस को,
मैंने तुम्हें हाँ कह दिया।
छह जुलाई को पहली बार,
जब हम एक-दूसरे की बाँहों में थे,
हम दोनों की धड़कनें तेज़ थीं,
और उस पल में सिर्फ़ प्यार था।
फिर CP का वो dosa,
NSP में मिलना बार-बार,
theatre में हाथों में हाथ,
और साथ बितता रहा हमारा प्यार।
हज़ार बार हमारी लड़ाइयाँ हुईं,
फिर भी प्यार कम नहीं हुआ।
हर खुशी, हर मुश्किल में,
हमने एक-दूसरे का साथ चुना।
रविश, मेरा वादा है तुमसे,
मैं हमेशा तुम्हारा साथ दूँगी,
चाहे कितने भी ups and downs आएँ,
मैं तुम्हारे साथ रहूँगी।
तेरा नाम मेरी रोज़ की ज़िंदगी का
सबसे खूबसूरत शब्द है,
तेरे साथ बिताई हर memory,
मेरी सबसे खूबसूरत memory है।
और तुमसे मिली तो जाना मैंने—
मुझे भी इतना प्यार किया जा सकता है।
आज हमारी कहानी यहाँ है,
और इसे यहीं खत्म नहीं होना है।
हर नए पल के साथ,
इस कहानी में एक नया पन्ना जुड़ना है।
Sign in to leave a comment.
No comments yet. Be the first!